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झूठों ने झूठों से कहा है, सच बोलो, सरकारी ऐलान हुवा है सच बोलो, घर के अंदर झूठों की एक मंडी है, दरवाजो पर लिखा हुवा है सच बोलो by राहत इन्दोरी

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क्या यही आझाद भारत है?

आज, कल जब में पेपर पड़ते रहता हु, ऐसा लगता है की मै मेरे देश के विनाश का manifesto पढ़ रहा हू. जो लगता है की जल्द ही पूरा होने वाला है. आज देश स्वतंत्र हो के 71 साल हो गये लेकिन आझादी का मतलब आजतक मुझे समज में नही आया, शायद आपको समज में आया होगा?. अगर आपको सच में आझादी और गुलामी का मतलब जानना है, तो आपको आपकी आखे खुली रखनी होगी चोहराओपे, कान खुले रखने होगे सच्चाई सुनने के लिये और ये कोई टीवी, newspaper and मीडिया नही देगी, आपको खुद चल कर जाना होगा, उस आखरी आदमी के पास जिसे इस देश का मीडिया कभी देख नही सकता.

क्या आपको पता है?  हमे इस अपने ही देश मै, अपने ही basic needs के लिये demand करनी पड़ती है. और साधारण बात है, आप भी भारतवासी है हम भी भारतवासी है, आपको भी पता है की यह demand कभी पूरी नहीं की जाती. क्यू? क्युकी इन्हे पता है की, अगर हम कोई demand पूरी कर दे तो ये लोग हमारे पास आयेंगे नही. हमारी वोटिंग बैंक satisfy हो जायेगी, और धीरे धीरे हमारी राजकीय strategy जो है, ओ बंद हो जायेगी. exa- आप महाराष्ट्र की ही राजनीती देखो ना, सरकार विदर्भा के नाम पे सत्ता में आयी और विदर्भ को ही भूल गयी, क्युकी विदर्भ अगर स्वतंत्र हो जाता है, और महाराष्ट दो भागो में बन जाता है, तो सत्ता में पैसा खाने का चान्स एक ही जगह का होगा. चोरी करने में दिक्कत आयेगी, और शायद नाम की राजनीती बंद हो जायेगी. 

आज और कल भी यही था! तुम सुन रहे थे, हम भी सुन रहे थे. क्युकी जिन घरो पे पत्थर बरस रहे थे, ओ घर काच के थे, लेकिन किसी और के थे, मै नही गया क्युकी ओ मेरे नही थे, कल मेरे घरो पर भी पत्थर बरसे, मेरा घर भी चारो तरफ से टूट गया, ओ नही आये क्युकी ओ भी मेरे नही थे, लेकिन मुझे लगता है अगला घर आपका भी हो सकता है..लेकिन हम आयेंगे क्युकी हमे पता है की कुछ लोगो ने एक circle बनाया है, और ओ अब उसका हर दिन चक्कर लगाने वाले है!  

आज दिन ब दिन देश की स्वतंत्रता रास्ते पर आ रही है, कभी किसानो के नाम, कभी अनाज, कभी स्टूडेंट ऐड, कभी आरक्षण तो कभी बलात्कार और आज के चाइल्ड डेथ की वजहसे, लेकिन ओ नही सुनेंगे क्युकी हमने बहरो के हात में देश की सत्ता दी है. इन्हें सिर्फ और सिर्फ राम की गाय ही जाहिए…बाकि लोगो से कुछ लेना देना नही.

अभी आप ही बताये की, जिस देश को हम कृषिप्रधान देश कहते है, उशी देश में किसानो को प्रोडक्शन कास्ट के लिए प्रोटेस्ट करना पड़ता है, आज अनाज को बनाने वाला रोड पर रखा हुवा अनाज खाता है. जिसके टैक्स से यहकी administration चलती है, ओ ही उस किसानो के हत्या का जिम्मेदार बनती है. और जिस देस or state को किसानो की स्मशान भूमि कहलाया जाता होगा…क्या उस देश में स्वतंत्रता होगी? जिस देश मै अपने विचारो और बोलने पर कोई एक्शन लेता होगा, क्या उस देश को स्वतंत्र कहेगे? आज इस (स्वतंत्र) भारत में दिन ब दिन कुपोषण से महिला और बच्चे मर रहे है, आज गाव में जिओ पहुच गया लेकिन रासन पता नही कब पहुचेगा, आदिवाशी एरिया में नक्सलिस्ट के नाम पर बलात्कार होते है, लेकिन ओ आप को नही दिखेंगे मुझे पता है..क्यों की आप अपने हिन्दुस्तानी वाली मीडिया पे गर्व करते है. क्युकी हमारे यह देश में देश के अंदर विरोध mean देशविद्रोह, राष्ट्र्द्रोह और कभी कभी पाकिस्तनी भी हो जाता है.

आपको पता तो होगा ही ……. उत्तरप्रदेश का योगिकांड- 1998 to 2017.

निचे का स्टेटस कॉपी किया है…फेसबुक wall से

 1. जहां 69 लाख का बिल न भरे जाने की वजह से 63 बच्चे मर गए और उसी शहर में 40 करोड़ गाय के आश्रय के लिए खर्च कर दिए गए और 70 लाख की शेरवानी स्वयं यहां का प्रधानमंत्री पहनता है।
2. जहां फ्रिज में बीफ होने के शक में घर में घुस कर हत्या कर दी जाती है और दूसरी तरफ बीफ का भारत सबसे बड़ा निर्यातक है।
3. जहां बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा दिया जाता है और हर रोज कहीं न कहीं बेटी का बलात्कार होता है और गन्ना, सरिया, पत्थर पूरी वीभत्सता के साथ घुसेड़ा जाता है।
4. जहां गाय के लिए एम्बुलेंस सुविधा है और औरतें सड़क पर बच्चों को जन्म दे रही हैं।
5. जहां प्रधानमंत्री काजू की रोटी खाता है और किसान या तो भूखों मर रहा है या फांसी लगा रहा है।
6. जहां तुमने 70 साल से अपने मुख्यालय में तिरंगा नहीं फहराया वहां मदरसों में तिरंगा फहराने और भारत माता की जय बोलने के सबूत के तौर पर वीडियो ग्राफी करवाते हो।
7. जहां तुम एक होनहार छात्र की संस्थागत हत्या करते हो और नजीब को गायब करवा देते हो और अपने गुर्गों से पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगवा कर जेएनयू जैसे संस्थान में दंगा करवाते हो।
8. जहां लोग जालीदार टोपी और गाढ़ी रखने में डरते हो और कहीं भी भीड़ की शक्ल लेकर किसी को भी कुचल कर या चाकुओं से गोदकर मार डालते हो।
9. जहां भगवा गमछा किसी के कांधे पर देख कर भय से शरीर में डर की सिहरन दौड़ जाती हो।
नहीं रहना ऐसी जगह…
-पूनम लाल की फेसबुक वाल से

 

 

My Experience on education

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My experience in my society….

I realize in society. Every person is talking about the right of education. but no one is talking about which and how to educate. who are getting an education and who are not getting an education. Why do they not get an education? No one is concerned about what are doing teacher in class. Are they teaching or not teaching?

Why is the government giving election work to the Teacher?

Are teacher agent of politics people?  Why teacher checks the paper on the basis of caste ? How they can judge the talent it could be the basis of the caste.

why teachers wants only quantity of  student? Why they don’t give the quality of education to the students?…..Why they celebrates the religion practices in the school ?  Are teacher increasing castism?

I don’t know how this originated. but I know one day we will get succeed.